पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में “धिक्कार मार्च” निकालेगी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि देश में महिला आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण विषय सामने आया है, जिससे महिलाएं चिंतित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं को अधिकार देने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को शामिल नहीं किया गया, जो एक बड़ी कमी है।
उन्होंने कहा कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिलाओं के साथ-साथ पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। कुशवाहा ने कहा कि जातीय जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ओबीसी वर्ग के पुरुषों और महिलाओं के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। परिसीमन के मुद्दे पर बोलते हुए कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इसकी मांग करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस सरकार ने संविधान में संशोधन कर परिसीमन पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण जनसंख्या के अनुपात में सीटों का पुनर्निर्धारण नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन लागू होता, तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा सीटें 243 से बढ़कर 365 हो सकती थीं, जिससे महिलाओं और युवाओं को अधिक अवसर मिलते। कुशवाहा ने कांग्रेस और राजद पर बिहार के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का धन्यवाद भी ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी जनगणना के आधार पर सीटों के निर्धारण की मांग को आगे भी उठाती रहेगी। अंत में उन्होंने ऐलान किया कि “अन्याय के खिलाफ” 22 अप्रैल को पूरे बिहार में जिला स्तर पर धिक्कार मार्च निकाला जाएगा।







