रांची: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मंगलवार को भाकपा (माओवादी) के 16 नक्सली कमांडरों और दस्ता सदस्यों ने 11 हथियार तथा 1,562 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें एक रीजनल कमेटी सदस्य, तीन जोनल कमेटी सदस्य, तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य, छह एरिया कमेटी सदस्य और तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इन नक्सलियों ने महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के कोल्हान और सारंडा क्षेत्र के सक्रिय सदस्य थे, जबकि दो नक्सली लातेहार जिले में सक्रिय थे। ये सभी माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल के दस्ते से जुड़े थे।
झारखंड पुलिस के अनुसार, राज्य में नक्सल विरोधी अभियान और संगठन के भीतर शोषण से परेशान होकर नक्सली लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसी अभियान के तहत इसी दस्ते के आठ अन्य नक्सली भी छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं पुलिस मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे गए हैं। इससे पहले 21 मई को 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा 13 जुलाई को 20 लाख रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी और 17 जुलाई को 25 लाख रुपये के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी भी सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि रही।
आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों में 15 झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो, रांची, सरायकेला और गिरिडीह जिलों के निवासी हैं, जबकि एक सदस्य ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले का रहने वाला है। झारखंड पुलिस का कहना है कि लगातार अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण राज्य में विशेषकर पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियां अब लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गई हैं। पुलिस ने शेष बचे नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय के रास्ते को छोड़कर मुख्यधारा में लौटें तथा राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।







