पटना/सासाराम: बिहार में मौसम ने इस बार समय से पहले ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के कई जिलों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है,जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोग भीषण गर्मी और लू जैसी परिस्थितियों का सामना करने को मजबूर हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल महीने में इस तरह की अत्यधिक गर्मी सामान्य नहीं मानी जाती। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार तापमान में असामान्य बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय रहने वाला पश्चिमी विक्षोभ इस बार कमजोर पड़ गया है। दूसरा, बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमीयुक्त पुरवा हवाएं भी अपेक्षाकृत कमजोर रही हैं। इन दोनों कारणों से राज्य में बारिश का सिस्टम विकसित नहीं हो पा रहा है, जिसका सीधा असर तापमान पर पड़ रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में हवा में नमी का स्तर करीब 23 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि वायुमंडलीय दबाव 1006 के आसपास है। कम नमी और तेज धूप के कारण गर्मी का प्रभाव और अधिक महसूस किया जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में मार्च और अप्रैल के दौरान 10 से 12 दिन बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस वर्ष बारिश के दिनों में स्पष्ट कमी देखी गई है। यही वजह है कि राज्य में तापमान तेजी से बढ़ा है और गर्मी ने अप्रैल में ही जून जैसी स्थिति पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर अप्रैल और मई के महीनों में बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवा हवाओं और शुष्क पछुआ हवाओं के मेल से दोपहर बाद बारिश का सिस्टम बनता है। हालांकि इस बार यह प्रभाव कमजोर रहने के कारण बारिश नहीं हो पा रही है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की गई है, ताकि लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।







