
पटना:बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी संजय हंस (संजय/संजीव हंस) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच एजेंसियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि वे सीधे तौर पर रिश्वत लेने के बजाय एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध लेनदेन को अंजाम देते थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब नौ लोगों का एक पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा था, जो बिचौलियों की तरह काम करते हुए ठेकेदारों, व्यापारियों और अन्य पक्षों से कमीशन वसूलते थे।
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और एसवीयू जैसी एजेंसियां कर रही हैं। एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में हर व्यक्ति की अलग भूमिका तय थी—कोई रकम वसूलता था, कोई हवाला या बैंक के जरिए ट्रांसफर करता था, तो कोई उस पैसे को संपत्ति या अन्य निवेश में लगाता था। जांच में यह भी सामने आया कि लेनदेन के दौरान “एस सर” (S Sir) कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे सीधे तौर पर अधिकारी का नाम सामने न आए।
सूत्रों के अनुसार, यह अवैध कमाई हवाला चैनलों और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए विभिन्न जगहों पर निवेश की जाती थी। कई संपत्तियों को जांच एजेंसियां बेनामी मान रही हैं। आरोप है कि जल संसाधन विभाग में तैनाती के दौरान ठेकेदारों से बड़े पैमाने पर कमीशन लिया गया।इस पूरे मामले में कुछ अन्य सहयोगियों और कथित बिचौलियों की भूमिकाएं भी सामने आई हैं, जिन पर अलग-अलग स्तर पर रिश्वत लेने, ट्रांसफर कराने और निवेश करने के आरोप हैं।हालांकि, अधिकारी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच अभी जारी है। इस प्रकरण ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






