महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में लगातार बारिश, खेतों में अधिक नमी और उमस के कारण धान तथा सब्जियों की फसलों में विभिन्न रोगों और कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि दवाओं और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बावजूद कई जगह अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है।
धान की फसल में भूरा माहो, तना छेदक, गंगई, ब्लास्ट और पत्ती मोड़क जैसे रोग एवं कीटों का असर देखा जा रहा है। वहीं सब्जियों में फंगस, सड़न-गलन, ब्लाइट समेत अन्य रोगों के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में इस खरीफ सीजन में करीब 2.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जा रही है। यहां अर्ली और लेट वेरायटी के अलावा मोटा, पतला और सरना किस्म के धान की खेती होती है। धान उत्पादन और उपार्जन के लिहाज से महासमुंद राज्य के प्रमुख जिलों में शामिल है।
धान के अलावा जिले में 12 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती की जा रही है। किसान फूलगोभी, पत्तागोभी, करेला, टमाटर, बैंगन, भिंडी, लौकी, खीरा, मिर्च, सेम और बरबट्टी समेत विभिन्न सब्जियों का उत्पादन करते हैं।
किसानों के अनुसार, रोग और कीट नियंत्रण के लिए निजी कृषि केंद्रों और सहकारी समितियों से दवाएं खरीदी जा रही हैं, लेकिन कई खेतों में इनका अपेक्षित असर नहीं हो रहा है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को लेकर किसान चिंतित हैं।
कृषि विभाग ने किसानों को कीटनाशक और अन्य कृषि दवाएं खरीदते समय पक्का बिल लेने तथा कृषि विस्तार अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का चयन करने की सलाह दी है। विभाग ने निर्धारित मात्रा में ही दवाओं का छिड़काव करने पर भी जोर दिया है।







