मुंबई: भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की जोरदार लिवाली के चलते रुपये में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की गई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 42 पैसे चढ़कर 93.99 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय मुद्रा पांच पैसे की बढ़त के साथ 94.41 रुपये प्रति डॉलर पर रही थी।
कारोबार की शुरुआत रुपये के लिए कमजोर रही। यह नौ पैसे की गिरावट के साथ 94.50 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि, शुरुआती दबाव के बाद रुपये ने तेजी से वापसी की और पूरे कारोबारी सत्र के दौरान इसमें मजबूती का रुख बना रहा। कारोबार के दौरान रुपया एक समय 93.83 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, अंत में यह 93.99 रुपये प्रति डॉलर पर स्थिर हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की मजबूती के पीछे विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर और पूंजी बाजार में बढ़ी दिलचस्पी प्रमुख वजह रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार में करीब 205.8 करोड़ डॉलर की शुद्ध लिवाली की। विदेशी निवेश से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ने और रुपये को समर्थन मिलने में मदद मिली।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की स्थिति मजबूत रहने के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव भी बना रहा। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले डॉलर सूचकांक में लगभग 0.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बावजूद घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की सक्रियता ने रुपये को मजबूती प्रदान की।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी निवेश के मजबूत प्रवाह ने रुपये की तेजी को सहारा दिया।







