मुंबई। Bombay High Court ने 2006 के चर्चित मालेगांव बम धमाका मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने इस दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल प्रतीत होता है। हाईकोर्ट ने राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर नरवरिया और लोकेश शर्मा को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को समाप्त कर दिया। कोर्ट ने सितंबर 2025 में विशेष अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि आरोप तय करते समय उपलब्ध साक्ष्यों और विरोधाभासों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था। गौरतलब है कि 8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव में सिलसिलेवार चार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 31 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसमें नौ मुस्लिम आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। बाद में जांच National Investigation Agency (NIA) को सौंपी गई, जिसने अपनी चार्जशीट में पूरी तरह अलग थ्योरी पेश करते हुए पूर्व आरोपियों को क्लीन चिट दे दी और नए आरोपियों को नामजद किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एटीएस और एनआईए की जांच में गंभीर विरोधाभास हैं, जिन्हें किसी भी स्थिति में एक साथ स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि एनआईए द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य मुख्यतः परिस्थितिजन्य थे और किसी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की। हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि इतने गंभीर मामले में ठोस और नए साक्ष्य जुटाने के प्रयास क्यों नहीं किए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कमजोर और असंगत साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।







