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परिसीमन पर CM स्टालिन का आरोप—नॉर्थ को फायदा, साउथ की आवाज दबाने की साजिश

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CM Stalin's allegation on delimitation: North benefits, conspiracy to suppress South's voice

तमिलनाडु : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के नाम पर सत्ता के पुनर्गठन की कोशिश है, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी डीएमके नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को आरक्षण देने का पूरा समर्थन करती है, लेकिन सीटों की कुल संख्या बढ़ाने के तरीके का विरोध करती है। उनका कहना है कि यदि परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया, तो उत्तर भारतीय राज्यों को लोकसभा में अधिक सीटें मिलेंगी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी घटकर लगभग 24 प्रतिशत रह जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने इसे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह कदम भारत के संघीय स्वरूप को कमजोर कर सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 1 का हवाला देते हुए कहा कि भारत राज्यों का संघ है और सभी राज्यों की आवाज़ को समान महत्व मिलना चाहिए। राज्यों की अनदेखी और बिना पर्याप्त परामर्श के ऐसे बड़े फैसले लेना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया जनसंख्या नियंत्रण में सफल दक्षिण भारतीय राज्यों को दंडित करने जैसा है। उनके मुताबिक तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन परिसीमन के जरिए उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम की जा रही है।

उन्होंने इस मुद्दे पर कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के समर्थन का भी जिक्र किया और कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम है। साथ ही, उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के समय पर भी सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रणनीति करार दिया।

स्टालिन ने दोहराया कि महिलाओं को आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए, लेकिन यह प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए, ताकि देश के सभी क्षेत्रों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।