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बंगाल की राजनीति में हलचल तेज, सुष्मिता देव का इस्तीफा; हिमंता से मुलाकात के मायने क्या?

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Stir in Bengal politics: Sushmita Dev resigns; what is the significance of her meeting with Himanta?

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी पर इन दिनों संकट के बादल छाए हुए हैं। ताजा घटनाक्रम में एक और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस हफ्ते पार्टी से इस्तीफा देने वालीं वे दूसरी राज्यसभा सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक, सुष्मिता देव ने बुधवार सुबह राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया। संसदीय पद छोड़ने के साथ ही सुष्मिता ने असम में तृणमूल कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को भी बड़ा झटका दिया है। उन्होंने असम टीएमसी के अध्यक्ष और सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस छोड़कर आईं 53 वर्षीय नेता 2021 में तृणमूल में शामिल हुईं और उन्होंने जनसेवा का नया अध्याय शुरू करने की बात कही थी। सूत्रों के मुताबिक, वह अब बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। इस बात अटकलें इसलिए भी लगाई जा रही हैं क्योंकि इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की है। सुष्मिता देव असम कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रभावशाली बंगाली नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं।

वह कांग्रेस की महिला शाखा ‘ऑल इंडिया महिला कांग्रेस’ की प्रमुख भी रह चुकी हैं। वह पहले असम के सिलचर से सांसद रह चुकी थीं, जो उनके पिता का गढ़ था। इससे पहले सोमवार को राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रे ने टीएमसी से इस्तीफे की घोषणा की थी। एक बयान में रे ने तृणमूल और बंगाल में उसकी 15 साल की सरकार पर भी तीखा हमला किया। ये इस्तीफे बंगाल में पार्टी के विधायक दल में हुई बड़ी बगावत के कुछ ही दिनों बाद आए हैं, जहां 58 तृणमूल विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय को नकारते हुए नेतृत्व से अलग रुख अपनाया और विपक्ष के नेता के पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया। इसके बाद टीएमसी के लोकसभा सांसदों ने ममता से बगावत करते हुए 20 लोकसभा सदस्यों ने स्पीकर ओम बिरला को बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन करने का एक पत्र सौंपा।  

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