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Purnia में जमीन रजिस्ट्री पर रोक: कैबिनेट का बड़ा फैसला, निर्माण भी बंद

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Ban on land registration in Purnia: Cabinet's big decision, construction also stopped

पूर्णिया: बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने पूर्णिया सहित राज्य के प्रमुख शहरों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ‘बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012’ के तहत पूर्णिया में चिह्नित टाउनशिप के विशेष और कोर क्षेत्रों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रधान सचिव विनय कुमार द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, पूर्णिया के इन चिह्नित क्षेत्रों में मास्टर प्लान अधिसूचित होने तक भूमि के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण और किसी भी प्रकार के नए निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्णिया के विकास के लिए मास्टर प्लान अधिसूचित करने की समय-सीमा 31 मार्च 2027 निर्धारित की गई है। इस अवधि तक चिह्नित टाउनशिप क्षेत्रों में अनियोजित विकास को रोकने के लिए जमीन की रजिस्ट्री और भवनों के निर्माण से संबंधित सभी कार्यों पर पाबंदी रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य शहर को ‘सैटेलाइट टाउनशिप’ के रूप में विकसित करना है, जिससे मुख्य शहर पर आबादी का बोझ कम हो सके। पूर्णिया के नियोजित विस्तार के लिए मास्टर प्लान-2030 के तहत विशेष जोन बनाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से पूर्णिया पूर्व प्रखंड (ब्लॉक) केंद्र में है:
* बेलौरी और अब्दुल्ला नगर: यह क्षेत्र टाउनशिप हब के रूप में उभरा है। एनएच-31 के किनारे स्थित इस इलाके को आधुनिक आवासीय सुविधाओं के लिए चिह्नित किया गया है। यहाँ पैनोरमा सिटी और ई-होम्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स नियोजित हैं।
* नया बाईपास और मरंगा: मरंगा को इसके औद्योगिक महत्व के कारण ‘मिश्रित टाउनशिप’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। नए बाईपास के दोनों ओर की भूमि को भविष्य के आवासीय क्लस्टर्स के लिए आरक्षित किया गया है।
* एयरपोर्ट जोन (एयरोसिटी): पूर्णिया एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों को हाई-एंड टाउनशिप और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए मास्टर प्लान में विशेष स्थान दिया गया है।

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विभाग के अनुसार, इस मास्टर प्लान आधारित विकास से न केवल नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली शहरी सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि नए आर्थिक केंद्रों का भी निर्माण होगा। इससे पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। निजी और संस्थागत निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भी यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।