
पटना: बिहार की सियासत इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज अटकलों के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, खासकर उनके विधानपरिषद और संभावित राज्यसभा सदस्यता को लेकर। नियमों के अनुसार, यदि कोई नेता दो सदनों के लिए निर्वाचित होता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है। हालांकि यह समयसीमा चुनाव परिणाम के गजट प्रकाशन के बाद ही लागू होती है, जो अभी तक जारी नहीं हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार संभवतः खरमास समाप्त होने के बाद ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। यह भी कहा जाता है कि वे बड़े राजनीतिक फैसले शुभ समय के बाद ही लेते हैं। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या वे राज्यसभा जाने के साथ ही मुख्यमंत्री पद भी छोड़ देंगे।
इसी बीच, रामनवमी के अवसर पर नए मुख्यमंत्री के ऐलान की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, लेकिन यह संभावना कम नजर आती है। जानकारी के अनुसार, उस दिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन पहले से निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे और खुद नीतीश कुमार भी पटना में मौजूद रहेंगे।
दूसरी ओर, चिराग पासवान के उस बयान ने हलचल बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एनडीए के भीतर नए मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, इस पूरे मामले को बेहद गोपनीय रखा गया है और केवल शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन—को ही इसकी जानकारी है।
संभावित नामों में सम्राट चौधरी, प्रेम कुमार, शाहनवाज हुसैन और संजीव चौरसिया जैसे नेता शामिल हैं, लेकिन अंतिम फैसला चौंकाने वाला हो सकता है। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल 2026 के बाद किसी भी दिन बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।






