पटना: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में सरकार ने समीक्षा तेज करने का फैसला लिया है। विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल 15 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के राजस्व कार्यों की समीक्षा करेंगे। बैठक में सभी अपर समाहर्त्ता, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता और अंचलाधिकारी शामिल होंगे।
लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर
समीक्षा बैठक में जिलावार राजस्व कार्यों के साथ-साथ ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की प्रगति की भी विस्तार से जानकारी ली जाएगी। मंत्री का विशेष जोर लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और आम लोगों को निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन सेवाओं का लाभ दिलाने पर रहेगा।
डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राजस्व संबंधी मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अपने क्षेत्र के लंबित मामलों की पहचान कर उनके त्वरित निष्पादन के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
ऑनलाइन सेवाओं में देरी पर तय होगी जवाबदेही
मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन राजस्व सेवाओं का उद्देश्य लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर से राहत दिलाना है। यदि ऑनलाइन आवेदन लंबे समय तक लंबित रहते हैं या किसी सेवा के लिए लोगों को बार-बार कार्यालय जाना पड़ता है, तो यह व्यवस्था के मूल उद्देश्य के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। केवल बैठकों और रिपोर्ट तक सीमित रहने के बजाय अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने होंगे।
कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर होगी नजर
आगामी समीक्षा बैठक में जिलावार प्रगति की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ऑनलाइन सेवाओं की गति और गुणवत्ता में सुधार के साथ लंबित मामलों के निष्पादन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े राजस्व मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। विभागीय निर्देशों के अनुपालन में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने सभी समाहर्त्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के सभी अपर समाहर्त्ता, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता और अंचलाधिकारियों की 15 सितंबर की समीक्षा बैठक में अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करें।







