Jharkhand politics mourns the death of Sudibya Kumar, the fourth minister in the Hemant Soren government.

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू के आकस्मिक निधन के साथ ही दिसंबर 2019 के बाद से हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल के चार मंत्रियों की पद पर रहते हुए मृत्यु हो चुकी है। इससे पहले हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का भी मंत्री रहते निधन हुआ था।

56 वर्षीय सुदिव्य कुमार झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने 2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह सीट से जीत दर्ज की थी। सरकार में उन्हें सक्रिय और प्रभावशाली मंत्रियों के तौर पर देखा जाता था। उनकी बेबाक कार्यशैली और विपक्ष के सवालों का तार्किक जवाब देने की क्षमता के कारण विधानसभा में भी उनकी अलग पहचान थी।

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अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में निधन

सुदिव्य कुमार शनिवार को शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे थे। देर रात गिरिडीह स्थित अपने आवास पर अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल गिरिडीह के मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन रविवार तड़के उनका निधन हो गया।

उनके आकस्मिक निधन की खबर सामने आते ही झारखंड के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। गिरिडीह में भी उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच गम का माहौल है।

छात्र आंदोलनों में भी निभाई अहम भूमिका

हाल के दिनों में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलनों के दौरान सुदिव्य कुमार सरकार और छात्रों के बीच संवाद स्थापित करने में सक्रिय रहे थे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने और सरकार तक उनकी बात पहुंचाने की कोशिश की थी।

गिरिडीह के स्थानीय विकास कार्यों में भी उनकी विशेष रुचि रहती थी। यही वजह थी कि क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ और लोकप्रियता मानी जाती थी।

2019 के बाद हेमंत सरकार के चार मंत्रियों का निधन

दिसंबर 2019 में हेमंत सोरेन के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक उनके मंत्रिमंडल के चार मंत्रियों का पद पर रहते निधन हो चुका है। इनमें दो मंत्रियों की मृत्यु हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल (2019-24) के दौरान हुई, जबकि मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही दो मंत्रियों का निधन हो गया।

हाजी हुसैन अंसारी: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे हाजी हुसैन अंसारी का 73 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद उन्हें हृदय संबंधी परेशानी हुई और हार्ट अटैक से उनकी मौत हुई। उनके निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को मंत्री बनाया गया।

जगरनाथ महतो: स्कूली शिक्षा एवं उत्पाद विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो का 56 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। कोरोना संक्रमण के कारण उनके फेफड़े गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। लंबे इलाज के बाद 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में उनका निधन हुआ। इसके बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया और वह डुमरी उपचुनाव में विजयी हुईं।

रामदास सोरेन: स्कूली शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन मंत्री रहे रामदास सोरेन का 62 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। किडनी प्रत्यारोपण के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी। 2 अगस्त 2025 को घर में गिरने के बाद उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां 15 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। बाद में उनके बेटे सोमेश सोरेन ने घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की।

सुदिव्य कुमार: चारों मंत्रियों में 56 वर्षीय सुदिव्य कुमार सबसे युवा नेताओं में शामिल थे। उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका, मुखर अंदाज और संगठन में पकड़ के कारण उन्हें हेमंत सोरेन सरकार के महत्वपूर्ण चेहरों में गिना जाता था। उनका अचानक निधन झारखंड की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।