सासाराम (रोहतास): विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर सासाराम में विभिन्न संगठनों ने विरोध मार्च निकाला। ग्रामीण मजदूर यूनियन सहित कई संगठनों के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे और बैनर लेकर केंद्र सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की।
धर्मशाला से समाहरणालय तक निकला मार्च
विरोध मार्च की शुरुआत सासाराम के धर्मशाला के समीप से हुई। यहां से प्रदर्शनकारी कतारबद्ध होकर पोस्ट ऑफिस चौक, कचहरी मोड़ और काली स्थान होते हुए जिला समाहरणालय पहुंचे। पूरे रास्ते ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ सहित कई नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया।
14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीण मजदूर यूनियन के नेता अशोक कुमार ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार और संबंधित चुनावी प्राधिकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद संचालित SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में करीब 14 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
अशोक कुमार ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनके मुताबिक, दिल्ली के मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा देश की सेवा कर रहे सेना के अधिकारियों के नाम भी मतदाता सूची से गायब होने की बात सामने आई है। उन्होंने इसे आम नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित करने वाली कार्रवाई बताया।
इस्तीफे और गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
अशोक कुमार ने कहा कि यह मार्च दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय आंदोलन के समर्थन में निकाला गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और उनकी गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाहरणालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराया और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।







