सासाराम: गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) के फैकल्टी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग द्वारा बुधवार को ‘आईईईई वीमेन इन इंजीनियरिंग (WIE) डे-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की पहले से सक्रिय आईईईई स्टूडेंट ब्रांच के अंतर्गत ‘आईईईई वीमेन इन इंजीनियरिंग (WIE) एफिनिटी ग्रुप’ का भी औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष की वैश्विक थीम “Technology with Purpose: Innovate Responsibly, Inspire Globally, Lead with Integrity” (मकसद के साथ टेक्नोलॉजी : जिम्मेदारी से नवाचार, वैश्विक स्तर पर प्रेरणा और ईमानदारी के साथ नेतृत्व) पर आधारित था। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद फैकल्टी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के डीन प्रो. (डॉ.) पंकज दशोरे ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीक केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त उपकरण भी है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना तकनीकी विकास अधूरा है और विश्वविद्यालय उन्हें नवाचार, शोध तथा नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आईईईई वीमेन इन इंजीनियरिंग एफिनिटी ग्रुप, कोलकाता सेक्शन की चेयर प्रो. (डॉ.) शैली सिन्हा चौधरी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और ऐसे कार्यक्रम उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने छात्राओं से आईईईई की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और रिसर्च प्रोजेक्ट्स में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) कुमार आलोक प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(Generative AI) शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता और प्रोफेशनल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि छात्राएं नई तकनीकों को समय रहते अपनाती हैं तो वे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगी और तकनीकी नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। परीक्षा नियंत्रक सुदीप कुमार सिंह ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज महिलाएं विज्ञान, अनुसंधान, सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और नई तकनीकों को सीखने के लिए प्रेरित किया।।कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. संगीता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आईईईई वीमेन इन इंजीनियरिंग एफिनिटी ग्रुप छात्राओं को तकनीकी कौशल विकसित करने, शोध गतिविधियों में भाग लेने तथा नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की कि डॉ. मोनिका को गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में आईईईई वीमेन इन इंजीनियरिंग (WIE) एफिनिटी ग्रुप का आधिकारिक एडवाइजर नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में यह समूह छात्राओं के लिए विभिन्न तकनीकी कार्यशालाएं, सेमिनार, रिसर्च।एक्टिविटी, इंडस्ट्री इंटरैक्शन और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित करेगा।
कार्यक्रम में नर्सिंग की डीन डॉ. के. लता, वाइस प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) श्वेता शर्मा, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के डीन प्रो. (डॉ.) रजनीश रत्ना, फैकल्टी ऑफ रिहैबिलिटेशन साइंसेज के डीन प्रो. (डॉ.) अवनीश रंजन, श्रीमती निरुपमा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने तकनीकी शिक्षा में लैंगिक समानता, महिला नेतृत्व, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक अवसरों जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि भारत में तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।।कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय ने दोहराया कि उसका उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना भी है, जहां छात्राएं नवाचार, अनुसंधान और नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। ‘वीमेन इन इंजीनियरिंग डे-2026’ का यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, तकनीकी उत्कृष्टता और जेंडर डाइवर्सिटी को बढ़ावा देने की दिशा में गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।







