
पटना: बिहार सरकार के पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने छात्रों के लिए कई नई योजनाओं और सुविधाओं की घोषणा की है। विभागीय मंत्री रमा निषाद ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य में शिक्षा और छात्र कल्याण को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा 520 छात्राओं की क्षमता वाले 12 पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय प्लस-टू उच्च विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों के साथ नए विद्यालय भवनों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही राज्य के सभी पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय प्लस-टू विद्यालयों में कुल 1365 स्वीकृत पदों के विरुद्ध अब तक 408 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि शेष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008-09 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभाग के वार्षिक योजना बजट में 42 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए उन्हें आईआईटी मद्रास के कनेक्ट प्रोग्राम के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डाटा साइंस जैसे कोर्स से जोड़ा जा रहा है। रमा निषाद ने बताया कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को जेईई, नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा राज्य में संचालित 38 जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावासों की कुल 3800 सीटों में से 2962 छात्रों का नामांकन हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के बिहार निवासी छात्रों को दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने पर ₹10,000 की छात्रवृत्ति दी जाती है।
वहीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। मंत्री ने बताया कि सरकार अनुमंडल स्तर पर भी आवासीय विद्यालय खोलने की योजना पर काम कर रही है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को ₹50,000 तक की सहायता से लैपटॉप उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। नइसके अलावा विभाग की योजनाओं और सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जल्द ही ऑनलाइन शिकायत पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।






