बिहार की राजधानी पटना में स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। देशभर के नगर निकायों की तरह यहां भी सिटिजन फीडबैक के लिए पोर्टल शुरू कर दिया गया है, जहां लोग 13 सवालों के जरिए अपने शहर की सफाई व्यवस्था पर राय दे रहे हैं। फील्ड असेस्मेंट 26 अप्रैल से शुरू हो चुका है, जबकि जीएफसी (Garbage Free City) और ओडीएफ प्रमाणन का मूल्यांकन मई में होने की संभावना है। पटना नगर निगम को पिछले वर्ष 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 21वां स्थान मिला था। गंगा किनारे बसे शहरों में यह चौथे स्थान पर रहा और जीएफसी में 3-स्टार रेटिंग प्राप्त की थी। इस बार रैंकिंग सुधारने के लिए निगम ने कई नई पहलें की हैं, जिनमें पिंक टॉयलेट, लू कैफे, ‘निगम नीर’ और मैनहोल एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सर्वेक्षण के दौरान 53 सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा शहर को कचरा मुक्त बनाने के लिए करीब 85 कूड़ा प्वाइंट समाप्त किए गए हैं। निगम का दावा है कि इस बार जीएफसी में फाइव स्टार रेटिंग और टॉप 20 में स्थान हासिल करने की पूरी संभावना है। कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग प्लांट स्थापित किए गए हैं और ट्रांसफर स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, सिटिजन फीडबैक के अंक भी इस बार बढ़ाकर 1000 कर दिए गए हैं, जिससे लोगों की भागीदारी और अहम हो गई है। बुडको (BUDCO) द्वारा संचालित छह एसटीपी के माध्यम से शहर के सीवेज को शुद्ध कर गंगा में छोड़ा जा रहा है। वहीं सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान और घर-घर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। नगर निगम का मानना है कि इन प्रयासों के बल पर पटना इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।







