बिहार की राजनीति में आज अहम दिन है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विधानसभा में विश्वास मत पेश करेंगे। नई सरकार को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। हालांकि मौजूदा आंकड़ों के अनुसार सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के पास 201 विधायक हैं, जिससे सरकार का विश्वास मत हासिल करना लगभग तय माना जा रहा है। गुरुवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा था कि सरकार को बहुमत साबित करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि एनडीए के सभी घटक दल—भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), रालोमो और हम—के विधायक विश्वास मत के दौरान एकजुट होकर सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे। यह पिछले छह महीनों में दूसरी बार है जब राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को विश्वास मत हासिल करना पड़ रहा है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित किया था। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित नई सरकार भी इसी प्रक्रिया से गुजर रही है। सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ जदयू कोटे से बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। शपथ लेने के बाद से ही मुख्यमंत्री लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं और जनता दरबार के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। विश्वास मत से एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग और आंतरिक संसाधन से जुड़े विभागों की समीक्षा बैठक भी की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने के नए स्रोत तलाशने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए। अब सभी की निगाहें विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां सरकार अपनी संख्या बल के दम पर बहुमत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।







