पटना। बिहार की राजनीति में शुक्रवार को अहम दिन रहा, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा पहुंचते ही विक्ट्री साइन दिखाकर अपने आत्मविश्वास का संकेत दिया। राज्य में नई सरकार के गठन के बाद विश्वास मत हासिल करने के लिए बुलाए गए विशेष सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, जिसमें लगभग 90 मिनट तक चर्चा निर्धारित की गई है। सदन में प्रवेश करते समय मुख्यमंत्री का यह अंदाज इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि सरकार बहुमत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए सरकार को 122 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के पास कुल 201 विधायक हैं। ऐसे में बहुमत साबित करना औपचारिकता मात्र माना जा रहा है। विशेष सत्र से पहले एनडीए के कई विधायकों ने सरकार के पक्ष में मजबूत दावा किया। जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा कि विश्वास मत केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है और सरकार को भारी बहुमत मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभव और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा। वहीं, जदयू विधायक पंकज मिश्रा ने दावा किया कि महागठबंधन के कुछ विधायक भी एनडीए के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। जदयू के ही अजीत कुमार ने भी विपक्ष को कमजोर बताते हुए सरकार को मजबूत समर्थन मिलने की बात कही। इसी बीच, अन्य सहयोगी दलों के विधायकों ने भी सरकार के पक्ष में एकजुटता दिखाई और विश्वास मत में सफलता को लेकर भरोसा जताया। अब सभी की निगाहें विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां सरकार अपने बहुमत को औपचारिक रूप से साबित करेगी।







