अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने कहा है कि राज्य सरकार मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और इस तरह के मामलों की जांच तथा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी छूट दी गयी है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित जांच चौकियों पर अत्याधुनिक स्कैनिंग प्रणाली लगाने की योजना है। उन्होंने कहा कि इस पर अधिक खर्च आयेगा, लेकिन इससे मादक पदार्थों की पहचान और तस्करी रोकने में सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी।
डॉ. साहा ने कहा कि आधुनिक स्कैनिंग तकनीक से मालवाहक ट्रकों की जांच तेजी से हो सकेगी और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति के अनुरूप होने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि म्यांमार से आने वाले मादक पदार्थ पहले असम पहुंचते हैं और वहां से त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश भेजे जाते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और तकनीक आधारित जांच प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। डॉ. साहा ने कहा कि पुलिस साक्ष्यों और कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से जांच करती है। उन्होंने हाल में एक ट्रेन से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुलिस की सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई का प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी में शामिल कई आरोपियों को दिल्ली और अन्य राज्यों से त्रिपुरा लाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इनमें से कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। डॉ. साहा ने कहा कि सरकार जांच प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करती। पुलिस लगातार करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त कर उन्हें नष्ट कर रही है, जिससे तस्करी के नेटवर्क को भारी आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार सख्त कानून प्रवर्तन, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।







