
दूसरे दिन नेपाल-भूटान समेत 25 राज्यों के विशेषज्ञों ने किया जागरूक
जमुहार (रोहतास): गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू), जमुहार में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रक्तदान महोत्सव सह सम्मेलन एवं कार्यशाला “रक्तदाता महाकुंभ 2.0” के दूसरे दिन रविवार को देश-विदेश से पहुंचे रक्त सेवा विशेषज्ञों, चिकित्सकों, समाजसेवियों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने रक्तदान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नेपाल और भूटान के प्रतिनिधियों के साथ देश के 25 राज्यों से आए रक्त सेवा से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेकर सुरक्षित एवं स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने पर अपने विचार साझा किए। गैर सरकारी संगठन पथ प्रदर्शक के तत्वावधान में तथा बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (बीएसएसीएस) के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रक्त सुरक्षा को मजबूत करना तथा लोगों के मन में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों, कार्यशालाओं और परिचर्चाओं में रक्तदान की वैज्ञानिक प्रक्रिया, सुरक्षित रक्त संग्रह, रक्त की उपलब्धता, आधुनिक ब्लड बैंक प्रणाली और स्वैच्छिक रक्तदान की बढ़ती आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में आज भी लाखों मरीज समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करते हैं। यदि प्रत्येक स्वस्थ नागरिक नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करे तो रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

इस अवसर पर रक्तदाता महाकुंभ के संस्थापक महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत नारायण मेडिकल कॉलेज से हुई थी और अब इसका दूसरा संस्करण गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल रक्तदान शिविर आयोजित करना नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलना है। आज भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान के बाद कमजोरी, बीमारी या शारीरिक नुकसान जैसी गलत धारणाओं के कारण रक्तदान से बचते हैं, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से सुरक्षित तरीके से किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे किसी प्रकार की स्थायी कमजोरी नहीं आती। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जिससे किसी अनजान व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
समाज के प्रत्येक सक्षम नागरिक को वर्ष में नियमित अंतराल पर स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए। उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा रक्तदान के प्रति समाज में सकारात्मक माहौल बनाने की अपील की। सम्मेलन में नेपाल, भूटान और देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों में चल रहे रक्तदान अभियानों के अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और युवाओं की सक्रिय भूमिका से स्वैच्छिक रक्तदान को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों, ब्लड बैंक अधिकारियों, मेडिकल एवं पैरामेडिकल छात्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
विभिन्न सत्रों में रक्त सुरक्षा, गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और भविष्य की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आयोजकों ने कहा कि “रक्तदाता महाकुंभ 2.0” केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि समाज में मानवता, सेवा और जीवन बचाने के संकल्प को मजबूत करने का अभियान है। ऐसे आयोजनों से लोगों में रक्तदान के प्रति विश्वास बढ़ेगा और अधिक से अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएंगे। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को इस जीवनरक्षक अभियान से जोड़ने का संकल्प लिया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि भविष्य में यह अभियान और व्यापक स्वरूप लेकर देशभर में स्वैच्छिक रक्तदान की नई मिसाल कायम करेगा।






