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चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की भक्ति में डूबे श्रद्धालु, मंदिरों में उमड़ी भीड़

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Maa Brahmacharini,

तप, संयम और साधना की प्रतीक देवी की आराधना, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘ब्रह्मचारिणी’ का अर्थ तप का आचरण करने वाली देवी होता है। मां का यह स्वरूप भक्तों को आत्मसंयम, धैर्य और समर्पण का संदेश देता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं, उन पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिरों में पूजा के लिए फूल, प्रसाद और दीप-धूप अर्पित किए जा रहे हैं। भक्त मां से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।

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धार्मिक मान्यता:
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य धर्मेंद्र तिवारी के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पूर्व जन्म में देवी हिमालय के घर पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई थीं। देवर्षि नारद के उपदेश पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। बताया जाता है कि मां ने हजारों वर्षों तक फल, मूल और शाक का सेवन किया और बाद में केवल सूखे बेलपत्रों पर निर्भर रहीं। अंततः उन्होंने निर्जल और निराहार रहकर घोर तप किया। इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें ‘ब्रह्मचारिणी’ नाम प्राप्त मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से जीवन में संयम, साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है। नवरात्रि का यह दिन साधना और श्रद्धा के साथ आत्मशुद्धि का संदेश देता है, जिसमें भक्त पूरी आस्था के साथ मां की पूजा में जुटे हैं।