
नयी दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार की ओर से रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्षी दलों के नेताओं ने कुछ देर के लिए सांकेतिक बहिर्गमन किया।
विपक्ष के नेताओं ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष मामला लंबित होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों के समूह एनसीपीआई को बैठक में आमंत्रित किए जाने के विरोध में बैठक से बहिर्गमन किया। बाद में सभी विपक्षी नेता बैठक में लौट आए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा “सभी विपक्षी दलों ने कुछ मिनट के लिए सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया। यह मोदी सरकार के उस फैसले के विरोध में था जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अंतिम निर्णय लंबित रहने के बावजूद तृणमूल के 20 ‘बागी’ सांसदों के लिए बने एनसीपीआई को बैठक में बुलाया गया।”
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि बागी सांसदों को दी गई मान्यता का कोई विधान नहीं है। विपक्ष ने इसका विरोध किया और इसी कारण बैठक से वॉकआउट किया।
आम आदमी पार्टी के एनडी गुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात को ‘हाइजैक’ कर लिया गया है। इस संबंध में उनकी याचिका पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने इसे अवैध बताते हुए कहा कि इन सांसदों को अलग और स्वतंत्र सीटें आवंटित करना गलत है।
उन्होंने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि सरकार और सदन के प्रबंधन का रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने इसी मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सर्वदलीय बैठक से सांकेतिक बहिर्गमन किया।






