रायपुर: कोलकाता पुलिस ने लगभग एक हजार करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गोयनका पिछले डेढ़-दो वर्षों से फरार चल रहे थे और इस दौरान मध्यप्रदेश पुलिस भी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। सूत्रों के अनुसार महेंद्र गोयनका पूर्व में मध्यप्रदेश के विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहे हैं। उनके विरुद्ध कंपनी से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा बिके हुए माल को कथित छल-कपट से बेचने के आरोपों की जांच चल रही है।
बताया गया है कि आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित किया गया। इस संबंध में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी सहित अन्य प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके अनुपालन में कोलकाता पुलिस ने यह कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार गोयनका तथा उनके निदेशकों के विरुद्ध मध्यप्रदेश के कटनी में भी धारा 420/120बी/467/468/471 के तहत दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं। बताया जाता है कि इस मामले में उनके सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय से खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद गोयनका पिछले लगभग डेढ़-दो वर्षों से फरार बताए जा रहे थे।
सूत्रों का यह भी दावा है कि मध्यप्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में सफल नहीं हो सकी। साथ ही यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि उन्हें मध्यप्रदेश में कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। उनकी गिरफ्तारी के बाद प्रदेश के कुछ अधिकारियों और कारोबारियों से जुड़े मामलों का भी खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका के संबंध में वित्तीय गबन से जुड़ी टिप्पणियां दर्ज हैं। इसके अलावा उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर के आरोप सामने आए हैं।







