लुधियाना। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि कर इसे 5.50 प्रतिशत किए जाने पर चिंता जताई है। फोरम ने केंद्रीय वित्त मंत्री से इस फैसले के प्रभाव की समीक्षा करने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ी ब्याज दरों के असर से राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
फोरम के अध्यक्ष बादिश जिंदल ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने से एमएसएमई, मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई पर कच्चे तेल की कीमतों, ऊर्जा लागत, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसे आपूर्ति-पक्ष के कारकों का प्रभाव है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने से आयातित महंगाई पर सीमित असर पड़ने की संभावना है।
फोरम के अनुसार, त्योहारी मौसम से पहले रेपो दर में वृद्धि का असर गृह ऋण, वाहन ऋण और एमएसएमई ऋण की मासिक किस्तों पर पड़ सकता है। इसके अलावा छोटी और मध्यम इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी की लागत बढ़ने से कारोबार की लागत भी प्रभावित हो सकती है। इससे उपभोक्ता मांग और नए निवेश पर दबाव पड़ने की आशंका है।
जिंदल ने कहा कि यदि एक करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी वाले विनिर्माण एमएसएमई पर 25 आधार अंक की पूरी वृद्धि का भार पड़ता है तो उसे सालाना करीब 25 हजार रुपये अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है। वहीं, 25 करोड़ रुपये की ऋण सीमा वाली इकाई के लिए यह अतिरिक्त बोझ करीब 6.25 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है।
फोरम ने सरकार से एमएसएमई क्षेत्र के लिए ब्याज सब्सिडी, रियायती कार्यशील पूंजी ऋण और ऋण गारंटी बढ़ाने जैसे उपाय करने की मांग की है। इसके साथ ही विशेष त्योहारी ऋण पैकेज देने और बैंकों द्वारा छोटी इकाइयों पर रेपो दर वृद्धि का पूरा बोझ डालने से रोकने के उपाय करने का आग्रह किया गया है।
फोरम ने कहा कि किफायती ऋण, मजबूत घरेलू मांग और एमएसएमई क्षेत्र की निरंतर वृद्धि आर्थिक गतिविधियों तथा रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।







