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EU का Meta पर सख्त रुख: WhatsApp AI फीस विवाद में थर्ड-पार्टी एक्सेस बहाल करने का निर्देश

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EU का Meta पर सख्त रुख: WhatsApp AI फीस विवाद में थर्ड-पार्टी एक्सेस बहाल करने का निर्देश

ब्रसेल्स। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर एआई असिस्टेंट्स को लेकर छिड़े विवाद में यूरोपीय आयोग ने टेक दिग्गज Meta के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह व्हाट्सएप बिजनेस पर थर्ड-पार्टी एआई चैटबॉट्स के लिए पहले जैसी मुफ्त पहुंच बहाल करे, जो 15 अक्टूबर 2025 से पहले लागू थी। दरअसल, Meta ने हाल ही में घोषणा की थी कि व्हाट्सएप बिजनेस प्लेटफॉर्म पर थर्ड-पार्टी एआई सेवाओं को इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को फीस देनी होगी। यूरोपीय आयोग का मानना है कि यह नीति प्रतिस्पर्धा को खत्म करने और बाजार में Meta के अपने एआई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है, जो यूरोपीय संघ के निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन है। आयोग के इस फैसले पर Meta ने भी अपनी आपत्ति जताई है।

कंपनी का कहना है कि यदि यह फीस हटाई जाती है, तो छोटे व्यापारियों पर बड़े एआई प्लेटफॉर्म्स का खर्च बढ़ सकता है, जो उनके लिए नुकसानदेह होगा। Meta के प्रवक्ता ने तर्क दिया कि छोटे यूरोपीय व्यवसायों को महंगे एआई टूल्स का बोझ उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। विवाद अब यूरोप के अन्य देशों तक भी फैल रहा है। इटली का प्रतिस्पर्धा नियामक भी इस मामले की जांच कर रहा है, जिससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में Meta पर और दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्हाट्सएप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एआई बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और बड़े टेक कंपनियों की बढ़ती ताकत को नियंत्रित करने से जुड़ा है। यदि आयोग सख्त कदम उठाता है, तो टेक कंपनियों और नियामकों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।

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