कोलकाता, ।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) से पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम कटने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि नई वोटर लिस्ट से करीब एक करोड़ नाम हटाए गए हैं, जबकि एसआईआर ट्रिब्यूनल में विचाराधीन 27 लाख लोगों को इस बार मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ेगा। अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि बंगाल में सिर्फ राज्य के निवासियों को ही वोट देने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के मतदाताओं को लाकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति हाल ही में बिहार या दिल्ली में वोट डाल चुका है और यहां वोट देने आता है, तो तृणमूल कार्यकर्ता उसे रोकेंगे।” हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-बंगाली नागरिकों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने आंतरिक मतभेद भुलाकर चुनाव पर फोकस करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव ममता बनर्जी के नेतृत्व का चुनाव है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अगले 15 दिनों तक गुटबाजी से दूर रहने और एकजुट होकर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने का संदेश दिया। अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन तृणमूल पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। फिलहाल वोटर लिस्ट को लेकर जारी विवाद ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।







