50 former Maoist cadres from Chhattisgarh have returned to the mainstream, rehabilitative scheme showing its impact.

गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के करीब 50 पूर्व माओवादी कैडर अब अपने पैतृक गांवों में लौट आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह वापसी लंबे समय से चल रहे पुनर्वास प्रयासों और पूर्व शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति की अपील के बाद संभव हुई है।

जानकारी के अनुसार, इन पूर्व कैडरों में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो कभी दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठनों से जुड़े रहे थे। इनमें से कुछ ने छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र पहुंचकर आत्मसमर्पण किया था। अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकारी पुनर्वास योजनाओं के जरिए सामान्य जीवन शुरू करने का फैसला किया है।

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भूपति की अपील का असर

पूर्व माओवादी नेता भूपति ने महाराष्ट्र प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद लगातार भूमिगत कैडरों से हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी अपील और प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे पुनर्वास प्रयासों ने पूर्व कैडरों को वापस लौटने के लिए प्रेरित किया।

आर्थिक सहायता और रोजगार पर जोर

पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व उग्रवादियों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन योजनाओं से पूर्व कैडरों को अपने भविष्य को लेकर भरोसा मिला है और वे शांतिपूर्ण नागरिक जीवन अपनाने के लिए आगे आए हैं।

अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के पूर्व माओवादी कैडरों की अपने पैतृक गांवों में वापसी को पुनर्वास प्रक्रिया में बढ़ते विश्वास का सकारात्मक संकेत बताया है। साथ ही इसे क्षेत्र में कमजोर पड़ रहे माओवादी आंदोलन के लिए एक झटका माना जा रहा है।

प्रशासन को उम्मीद है कि इन पूर्व कैडरों की वापसी से प्रेरित होकर अन्य भूमिगत माओवादी भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करेंगे और हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे।