वाशिंगटन: संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान ईरान कथित तौर पर वित्तीय मामलों, विशेष रूप से अपनी संपत्ति पर से पाबंदी हटाने को प्राथमिकता दे रहा है।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ आधे-अधूरे मन से बातचीत कर रहा है, जबकि ईरान की आर्थिक स्थिति कथित तौर पर बिगड़ रही है।
श्री वाल्ट्ज ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा कि ईरान अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से ज्यादा वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से डरता है। उनका कहना है कि ईरान बमबारी सह सकता है, लेकिन पैसे से जुड़े दबाव से ज्यादा परेशान होता है। इसलिए बातचीत में ईरानी बार-बार पैसों की ही बात करते हैं और अपनी सेना की चिंता कम करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प जब तेहरान पर दबाव की बात करते हैं, तो उनका बिल्कुल यही मतलब होता है।
राजदूत ने कहा, “यह (दबाव), नाकाबंदी के साथ मिलकर, वही चीज़ है जो आखिरकार ईरानियों को झुकने पर मजबूर करेगी।”
गौरतलब है कि 18 जून को ईरान के साथ हुए संघर्षविराम समझौते को श्री ट्रम्प द्वारा अमान्य घोषित किए जाने के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने स्पष्ट किया कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक जहाजों के खिलाफ हमले के जवाब में थे।
ईरान की सेना ने इसके जवाब में पश्चिमी एशिया के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। ईरान ने अमेरिका पर संघर्षविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप भी लगाया।







