
नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला करते हुए एक अंग्रेजी दैनिक में लेख लिखकर कहा है कि युवाओं की आवाज दबाने के लिए उन पर कार्रवाई की गई है जिस पर सरकार का जवाब जरुरी है।
श्री गांधी के इस लेख का समर्थन करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहां है कि छात्रों पर कार्यवाही के लिए गृहमंत्री अमित शाह जिम्मेदार है। अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में श्री गांधी ने छात्रों पर बल प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा है कि अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे छात्रों पर पैलेट गन, कीलों वाली लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तविकता से पूरी तरह कटे हुए हैं और छात्रों का यह आंदोलन उनके लिए चेतावनी है कि देश के युवा जाग चुके हैं।
श्री गांधी ने कहा कि युवाओं के बीच प्रधानमंत्री की छवि नष्ट हो चुकी है और उसे दोबारा बनाया नहीं जा सकता। देश के युवा श्री मोदी, श्री शाह या किसी अधिकारी को उनके कार्यों के परिणामों से बचने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष युवाओं के साथ खड़ा है और इन कथित अपराधों को बिना सजा के नहीं जाने देगा।
श्री खरगे ने श्री गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने लेख के माध्यम से युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि युवाओं के साथ हुई ज्यादती का जवाब सरकार को देना होगा।
श्रीमती वाड्रा ने भी श्री गांधी के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि संसद से महज 500 मीटर की दूरी पर छात्रों पर बर्बर कार्रवाई की गई और इसकी जिम्मेदारी श्री शाह की है।
उन्होंने राहुल गांधी के हवाले से कहा कि इस मामले में दो ही संभावनाएं हैं—या तो गृह मंत्री ने छात्रों पर कार्रवाई की अनुमति दी, ऐसी स्थिति में वह जिम्मेदार हैं, अथवा उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी, तो यह उनकी पूरी तरह अक्षमता को दर्शाता है। दोनों ही परिस्थितियों में, गृह मंत्री के तौर पर इस घटना की जिम्मेदारी उनकी है और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
राहुल गांधी ने एक अन्य टिप्पणी में कहा कि युवा महिलाओं के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, कई छात्र घायल हुए और नाबालिग छात्रों की हड्डियां तक टूटने की बात सामने आई। उन्होंने सवाल किया कि सरकार छात्रों के सवालों का जवाब इस तरह क्यों दे रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के करीब 20 दिन बाद भी गृह मंत्री अमित शाह संसद में इस मामले पर जवाब देने नहीं आए हैं और चर्चा के लिए विपक्ष की ओर से दिए गए हर प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है।
श्री गांधी ने कहा कि गृह मंत्री की चुप्पी महज चूक नहीं है, बल्कि यह हिंसा को मंजूरी देने के समान है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की और कहा कि विपक्ष छात्रों को न्याय दिलाने तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होने तक अपनी लड़ाई जारी रखेगा।






