मुंबई: संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ के प्रदर्शन को करीब तीन दशक पूरे हो चुके हैं। वर्ष 1996 में प्रदर्शित इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा को एक ऐसे फिल्मकार से परिचित कराया, जिसने आगे चलकर भारतीय सिनेमा की दृश्यात्मक और भावनात्मक भाषा को अपनी विशिष्ट शैली से नई पहचान दी।‘खामोशी: द म्यूजिकल’ अपनी संवेदनशील कहानी, संगीत और प्रभावशाली दृश्य प्रस्तुति के कारण भंसाली की आगे की फिल्म यात्रा की मजबूत नींव बनी। इसके बाद उन्होंने ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘ब्लैक’, ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान कायम की।
भंसाली की फिल्मों में भव्य सेट, आकर्षक परिधान, संगीत, दृश्य संयोजन और भावनात्मक कथानक प्रमुख विशेषताएं रही हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, इतिहास और मानवीय भावनाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत करते हुए भारतीय सिनेमा को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ के जरिए उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ वेब श्रृंखला के क्षेत्र में भी अपनी रचनात्मक पहचान को विस्तार दिया। उनकी रचनात्मक उपलब्धियों को सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और वर्ष 2015 में प्रदान पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें बाफ्टा पुरस्कार के लिए भी नामांकन मिला है।
भंसाली ने गणतंत्र दिवस की झांकी तैयार करने वाले पहले फिल्मकार के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। ‘भारत गाथा’ नामक इस प्रस्तुति में भारतीय सिनेमा की यात्रा और उसकी वैश्विक पहचान को देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ प्रस्तुत किया गया।
राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे दिग्गज फिल्मकारों की परंपरा में भंसाली का नाम भी लिया जाता है। उनकी फिल्मों ने भारतीय कहानी कहने की शैली को भव्यता और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत करने का एक अलग मानक स्थापित किया है। ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ के तीन दशक बाद भी भंसाली का प्रभाव हिंदी सिनेमा पर कायम है। उनकी आगामी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।







