मजदूर की मौत पर NHRC सख्त, ओडिशा सरकार से मांगा जवाब
NHRC takes a stern view of worker's death; seeks response from Odisha government

भुवनेश्वर : ओडिशा के जाजपुर जिले में क्रशर यूनिट में एक मजदूर की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में पुलिस और अन्य सरकारी अधिकारियों की गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश किए जाने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार को अपना जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

आयोग ने ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि मामले में पुलिस की भूमिका और कथित लापरवाही की जांच पुलिस उपाधीक्षक (DSP) या उससे वरिष्ठ रैंक के अधिकारी से कराई जाए। जांच पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपने को कहा गया है।

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मानवाधिकार कार्यकर्ता श्रीकांत पकल की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कहा कि प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में देरी और जांच में कथित लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। इससे पीड़ित के जीवन और गरिमा के अधिकार के साथ-साथ उसके परिवार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले न्याय के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

मामले के अनुसार, मृतक अरिजीत जेना (22) पर धर्मशाला ब्लॉक स्थित पद्माबती क्रशर यूनिट में उसके मालिक और कुछ साथियों ने कथित तौर पर लोहे की रॉड से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल जेना को पहले धर्मशाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

आयोग ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बावजूद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की। एफआईआर मृतक की मौत के बाद दर्ज की गई थी। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इस घटना की सूचना चिकित्सा-कानूनी मामले के रूप में दी थी।

इसके अलावा, आयोग ने क्रशर यूनिट के मालिक के खिलाफ जांच लंबित रहने पर भी चिंता जताई है, जबकि तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पुलिस कार्रवाई में देरी कराई और मृतक के परिवार को धमकाया। अब आयोग की कार्रवाई से मामले में जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।