लखनऊ। उत्तर प्रदेश में डीएलएड (बीटीसी) पाठ्यक्रम में छात्रों की घटती रुचि से निजी कॉलेजों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। पर्याप्त आवेदन नहीं मिलने के कारण इस वर्ष करीब 25 निजी कॉलेजों ने मान्यता वापस लेने के लिए आवेदन किया है।
दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बावजूद 2.39 लाख सीटों के मुकाबले 1.52 लाख आवेदन ही प्राप्त हुए। काउंसिलिंग में कॉलेजों का विकल्प भरने वाले अभ्यर्थियों की संख्या घटकर करीब 1.03 लाख रह गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पसंद का कॉलेज नहीं मिलने पर कुछ अभ्यर्थी दाखिला छोड़ सकते हैं।
डीएलएड में आवेदन की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार घटी है। पिछले वर्ष 2.39 लाख सीटों के लिए 1.24 लाख आवेदन आए थे। वहीं 2024 में 2.33 लाख सीटों के मुकाबले 3.07 लाख और 2023 में 3.36 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे।
प्रदेश में वर्तमान में 67 सरकारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) और 2,974 निजी डीएलएड कॉलेज हैं। छात्रों की कमी के चलते निजी संस्थानों की ओर से मान्यता वापसी के आवेदन किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, मान्यता वापसी के आवेदनों का पहले परीक्षण किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि आवेदन कॉलेज की संबंधित समिति के अनुमोदन से भेजा गया है या किसी व्यक्ति अथवा प्रबंधक की ओर से। जांच के बाद प्रस्ताव निदेशक के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय होगा।
जानकारों के अनुसार, डीएलएड में छात्रों की घटती रुचि की एक प्रमुख वजह रोजगार की अनिश्चितता है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहले ही यह प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं, जबकि पिछले छह वर्षों से बेसिक शिक्षकों की नई भर्ती नहीं हुई है।
दाखिला प्रक्रिया में देरी और पात्रता से जुड़े बदलावों ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। पिछले वर्ष न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण दाखिले दिसंबर में हुए थे। इस वर्ष बीएड के साथ डीएलएड की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन स्नातक अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिला। उस समय कई विश्वविद्यालयों के परिणाम भी जारी नहीं हुए थे।
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने कहा कि रोजगार की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता डीएलएड में कम दाखिलों की मुख्य वजह है। उन्होंने सत्र और परीक्षाएं समय पर कराने की जरूरत बताई।







