नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी और अपराधों के सीमा रहित स्वरूप को देखते हुए इनके प्रभावी नियंत्रण के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध अब किसी एक देश की समस्या नहीं रह गए हैं और इनके खिलाफ सरकारों तथा संबंधित संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर दुनिया में भौगोलिक सीमाओं का महत्व काफी कम हो गया है। एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देश के लोगों के साथ मिलकर किसी तीसरे देश में साइबर अपराध को अंजाम दे सकता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विभिन्न देशों की सरकारों, वित्तीय संस्थानों, दूरसंचार नेटवर्क और सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाना समय की आवश्यकता है। प्रौद्योगिकी तभी व्यापक रूप से स्वीकार्य होती है, जब लोगों को उस पर विश्वास हो। प्रधानमंत्री के अनुसार आम नागरिक तकनीकी प्रोटोकॉल और साइबर सुरक्षा की जटिलताओं को नहीं समझता। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसे आने वाली फोन कॉल या संदेश वास्तविक है या नहीं और उसके द्वारा भेजा जा रहा पैसा सही व्यक्ति या संस्था तक पहुंच रहा है या नहीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में आम लोगों का तकनीक पर भरोसा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के साथ-साथ सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संचार सारथी ऐप का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश में डिजिटल धोखाधड़ी और मोबाइल चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण में मदद मिली है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दूरसंचार और डिजिटल सेवा क्षेत्र से जुड़ी देश-विदेश की कंपनियों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में डिजिटल तकनीक, दूरसंचार और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो रही है।







