भभुआ। गैस एजेंसी संचालकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। संचालकों का कहना है कि यदि सरकार उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो उनके पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अपनी मांगों के समर्थन में स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार सरकार की ओर से उनकी समस्याओं पर बातचीत तो की जाती है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती परिचालन लागत और अन्य व्यावसायिक चुनौतियों के बीच एजेंसियों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
संचालकों ने बताया कि विरोध के तहत जिला मुख्यालय भभुआ में कैंडल मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन करने की तैयारी है। इस आंदोलन में देशभर के गैस डिस्ट्रीब्यूटरों की भागीदारी की बात कही गई है।
गैस एजेंसी संचालकों का दावा है कि देशभर में करीब 26 हजार डिस्ट्रीब्यूटर इस क्षेत्र से जुड़े हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में एजेंसियां उपभोक्ताओं तक रसोई गैस पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन उनकी अपनी समस्याओं के समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
संचालकों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं पर केवल आश्वासन देने के बजाय व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
गैस एजेंसी संचालकों ने स्पष्ट किया कि वे बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं, लेकिन लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में हड़ताल का रास्ता अपनाना उनकी मजबूरी होगी। आंदोलन के अगले चरण को लेकर संगठन स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।







