नयी दिल्ली। कांग्रेस ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से जुड़े मुद्दों को संसद में प्राथमिकता के साथ उठाने और उनकी नियमित निगरानी के लिए एससी-एसटी संसदीय फोरम गठित किए जाने की मांग की है। पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रमुख और उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में यह मांग रखी।
गौतम ने कहा कि पहले एससी-एसटी से जुड़े मामलों के लिए एक संसदीय फोरम मौजूद था, जिसके माध्यम से इन समुदायों से संबंधित मुद्दों को लगातार संसद में उठाया जाता था। उन्होंने कहा कि ऐसे फोरम का उद्देश्य संबंधित विषयों को प्राथमिकता देना और सदन में उन्हें प्रभावी तरीके से रखने के साथ-साथ उनकी नियमित निगरानी करना था।
उन्होंने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की तर्ज पर देशभर में विशेष कानून बनाए जाने की भी मांग की। उनके अनुसार, ऐसे कानूनी प्रावधानों से अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) और जनजातीय उप-योजना (TSP) के लिए निर्धारित राशि को दूसरी मदों में स्थानांतरित करने से रोका जा सकेगा तथा आवंटित धन का निर्धारित अवधि में उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी उप-योजनाओं के लिए कानूनी ढांचे के प्रावधान मौजूद हैं। केंद्र के स्तर पर जनजातीय उप-योजना का ढांचा अब डेवलपमेंट एक्शन प्लान फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स (DAPST) के नाम से संचालित है और केंद्र सरकार के अनुसार इसके लिए निर्धारित राशि को अलग बजट मदों में दर्शाया जाता है।
गौतम ने आरोप लगाया कि एससीपी और टीएसपी के लिए आवंटित धन का एक हिस्सा या तो समाप्त हो रहा है या अन्य मदों में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन समुदायों के विकास के लिए योजनाएं संबंधित नोडल एससी-एसटी विभागों के माध्यम से तैयार और लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी समुदायों से जुड़े विषयों की लगातार निगरानी और शिकायतों को संसद के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए संसदीय फोरम एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। कांग्रेस ने इसी व्यवस्था को फिर से स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया है।







