कोच्चि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक, सांस्कृतिक आयोजक और मलयालम साप्ताहिक ‘केसरी’ के पूर्व संपादक एम ए कृष्णन का मंगलवार को कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। उनके निधन से सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
17 जनवरी 1929 को कोल्लम जिले के अयिराकारा में जन्मे कृष्णन ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद तिरुवनंतपुरम के महाराजा संस्कृत कॉलेज से तर्कशास्त्र में ‘महोपाध्याय’ की योग्यता हासिल की। वह आरएसएस से वर्ष 1947 में जुड़े और बाद में संगठन के पूर्णकालिक प्रचारक बने। करीब एक वर्ष तक कोट्टायम जिले के वाज़ूर हाई स्कूल में अध्यापन करने के बाद उन्होंने 1954 में शिक्षक की नौकरी छोड़कर प्रचारक के रूप में कार्य शुरू किया।
प्रचारक के तौर पर उन्होंने कोट्टायम, एर्नाकुलम, अलाप्पुझा और कोल्लम जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें लोग प्यार से ‘एमएस सर’ के नाम से भी जानते थे। उन्होंने केरल में सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। विशेष रूप से बच्चों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े कई कार्यक्रमों और संस्थाओं के विकास में उनका योगदान रहा।
कृष्णन ‘बालगोकुलम’ और ‘तपस्या कला साहित्य वेदी’ के संस्थापकों और मार्गदर्शकों में शामिल रहे। इसके अलावा वह ‘अमृतभारती’, ‘बालसंस्कार केंद्रम’, ‘बालसाहित्य प्रकाशन’, ‘इंटरनेशनल श्रीकृष्ण केंद्र’ और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘सौरक्षिका’ जैसी पहलों से भी जुड़े रहे।
वर्ष 1964 में वह मलयालम साप्ताहिक ‘केसरी’ के संपादक बने और 1990 तक इस जिम्मेदारी पर रहे। उनके कार्यकाल में पत्रिका ने केरल के मंदिरों, सांस्कृतिक केंद्रों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और विभिन्न सामाजिक विषयों पर कवरेज को विस्तार दिया। कई प्रसिद्ध विद्वानों और लेखकों ने भी पत्रिका में योगदान दिया।
कृष्णन ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष एर्नाकुलम के एलामक्कारा स्थित आरएसएस के दक्षिण केरल मुख्यालय ‘माधव निवास’ में बिताए। वह आरएसएस के केरल प्रांत के बौद्धिक और प्रचार विभाग से भी लंबे समय तक जुड़े रहे।







