30,985 crore railway projects in Vadodara get a boost

वडोदरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान करीब 30,985 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (DFC) के तीन खंड राष्ट्र को समर्पित किए और चार मालगाड़ियों के साथ एक यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

प्रधानमंत्री ने 20,703 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार DFC के करीब 326 किलोमीटर लंबे तीन खंडों का लोकार्पण किया। इनमें साणंद (उत्तर)-मकरपुरा, न्यू उमरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-जेएनपीटी खंड शामिल हैं।

GNSU Admission Open 2026

KATHA CONCERT KOLKATA

इन रेल खंडों के शुरू होने से मुंबई के जेएनपीटी बंदरगाह से आयात-निर्यात से जुड़े माल की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क मजबूत होगा, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और मुंबई के मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा। पश्चिमी DFC के इन हिस्सों के चालू होने से मुंबई से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक माल ढुलाई को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने न्यू साणंद (उत्तर), न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगांव और न्यू जेएनपीटी से मालगाड़ियों को रवाना किया। इसके अलावा वडोदरा और टांडा रोड के बीच नई यात्री ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई गई। इससे गुजरात के वडोदरा और छोटा उदयपुर तथा मध्य प्रदेश के अलीराजपुर क्षेत्र के यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने छोटा उदयपुर-धार परियोजना के तहत निर्मित जोबट-टांडा रोड नई रेल लाइन को भी राष्ट्र को समर्पित किया। करीब 553 करोड़ रुपये की लागत से बने इस रेल खंड से अलीराजपुर के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी रेल लाइन, विश्वामित्री-दभोई दोहरीकरण और मियागाम करजन-चोरंडा-मलसर गेज परिवर्तन परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी लाइन परियोजना की अनुमानित लागत 8,885 करोड़ रुपये है, जबकि विश्वामित्री-दभोई दोहरीकरण पर करीब 394 करोड़ और मियागाम करजन-चोरंडा-मलसर गेज परिवर्तन पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इन परियोजनाओं से गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच रेल संपर्क मजबूत होने के साथ यात्री और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने तथा प्रमुख रेल मार्गों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।