लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा पर राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश यादव को राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और उसके नेता रहे चौधरी चरण सिंह के परिवार के प्रति की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए।
मायावती ने सपा को ‘अति-अहंकारी’ और ‘जातिवादी’ राजनीति करने वाली पार्टी बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों और सहयोगियों के प्रति संकीर्ण सोच से बचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में विरोधी दलों के साथ-साथ सहयोगी दलों के प्रति भी राजनीतिक द्वेष दिखाई देता रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा बार-बार अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन करती है और राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद गठबंधन टूट जाता है। उन्होंने वर्ष 1993 के सपा-बसपा गठबंधन और 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख करते हुए सपा की पुरानी राजनीतिक घटनाओं पर भी निशाना साधा।
मायावती ने कहा कि बाद में अखिलेश यादव की ओर से पुरानी गलतियों को नहीं दोहराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन का टूटना भी सामने आया। उन्होंने इसे सपा की गठबंधन राजनीति के प्रति अस्थिर रवैये से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
बसपा प्रमुख ने दावा किया कि उनकी पार्टी सामाजिक सम्मान और आत्मसम्मान के साथ ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर कायम है। उन्होंने सपा पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
मायावती ने अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए इसके अर्थ को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती ने उत्तर प्रदेश की जनता से सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील की और इसे प्रदेश के व्यापक हित में बताया।







