हैदराबाद: तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने मंगलवार को तेलंगाना में कांग्रेस सरकार पर सामाजिक न्याय का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया और गरीबों के लिए आरक्षित ज़मीन का बड़े पैमाने पर दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया गया।
बंजारा हिल्स स्थित टीआरएस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सामाजिक न्याय के बारे में तब बात करना शुरू किया, जब उनके संगठन ने “सामाजिक न्याय तेलंगाना” बैठक आयोजित की। सुश्री कविता ने राज्य कैबिनेट में पिछड़ा वर्ग , अनुसूचित जाति,अनसुचित जनजाति, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राज्य के बजट का बहुत छोटा हिस्सा ही पिछड़ा वर्ग कल्याण पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने सलाहकार और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि सामाजिक न्याय बयानों के बजाय सरकारी कार्यों में दिखना चाहिए।
उन्होंने पिछड़े वर्ग के नेताओं और मंत्रियों के कथित अपमान को लेकर सरकार की आलोचना की और दावा किया कि अल्पसंख्यकों को कैबिनेट में जगह उनके संगठन के दबाव के बाद ही मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एससी और एसटी के लिए आवंटित राशि का 40 प्रतिशत से भी कम इस्तेमाल हो रहा है। ज़मीन से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए सुश्री कविता ने तेलंगाना में बड़े पैमाने पर ज़मीन हड़पने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से गरीबों की लगभग 30 हजार एकड़ ज़मीन छीन ली गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि असाइन की गयी ज़मीन और भूदान ज़मीन का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया जा रहा है और मांग की कि असाइन की गयी ज़मीन के लाभार्थियों को मालिकाना हक दिया जाए।
सुश्री कविता ने ज़मीन के नए सिरे से बंटवारे की मांग की और घोषणा की कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह प्रस्तावित ‘भू लक्ष्मी’ योजना लागू करेगी, जिसके तहत हर परिवार को एक एकड़ ज़मीन दी जायेगी। उन्होंने दावा किया कि राज्य में इस मकसद के लिए पर्याप्त सरकारी और भूदान ज़मीन उपलब्ध है और आरोप लगाया कि बेनामी ज़मीन की पहचान करके उसे भी गरीबों में बांटा जा सकता है। तेलंगाना के बुद्धिजीवियों और लोगों से ज़मीन हड़पने के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए सुश्री कविता ने कहा कि ज़मीन आदिवासियों, गरीबों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए “जीवन का आधार” है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज़मीन के हस्तान्तरण को आसान बनाने के लिए धरणी, भू भारती और 22-ए प्रावधान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सामाजिक न्याय के एक अहम हिस्से के तौर पर ज़मीन के दोबारा बंटवारे की अपनी मांग दोहरायी।







