Home बिहार स्वास्थ्य विभाग के नए फैसले से डॉक्टरों में हलचल, निशांत कुमार भी...

स्वास्थ्य विभाग के नए फैसले से डॉक्टरों में हलचल, निशांत कुमार भी चर्चा में

42
0
The new decision of the Health Department has created a stir among doctors, Nishant Kumar is also in the news.

पटना: राष्ट्रीय जनतात्रिक गठबंधन की नई सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का पद जब मंगल पांडेय को न देकर पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के दे दिया गया था तो सियासी गलियारे से स्वास्थ्य महकमे में कई सवाल एक साथ उठने लगे। इनमें सबसे मुख्य सवाल यही था कि क्या निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार की सबसे प्रमुख घोषणाओं में से एक ‘सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस’ प्रैक्टिस पर रोक लगा पाएंगे? निशांत या उनकी टीम से किसी ने भी इस सवाल का जवाब तो नहीं दिया लेकिन स्वास्थ्य विभाग में हो रहे बदलाव ने बड़ा संकेत जरूर दे दिया है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि निशांत अपने पिता के नक्शे कदम पर ही चल रहे हैं। वह धीरे-धीरे व्यवस्था में बदलाव करना चाहते हैं। इसकी शुरुआत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की हाजिरी को लेकर निकले नए आदेश से हुई है। अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी कर्मियों को निर्धारित ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उपस्थित रहना होगा और बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाया जाएगा। प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। रात्रिकालीन ड्यूटी को लेकर भी विभाग सख्त नजर आ रहा है। रात की पाली में तैनात डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है।

वरिष्ठ चिकित्सकों को आपातकालीन सेवाओं की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों को रात में भी बेहतर उपचार मिल सके। इधर, निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाए जाने से पहले चिकित्सकों ने एनडीए सरकार के सामने अपनी शर्तें रख दी है। एक दिन पहले यानी रविवार को बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) की ओर से आयोजित महासम्मेलन में डॉक्टरों ने सेवा से जुड़ी समस्याओं, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर एकजुट हुए। डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में आईएमए हॉल से जेपी गोलंबर तक मार्च भी निकाला। डॉक्टरों ने सरकार से सेवा चिकित्सकों के लिए आवास और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहे चिकित्सा पदाधिकारियों को वाहन सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। चिकित्सकों ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा गार्डों की पर्याप्त तैनाती की आवश्यकता बताई। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ का कहना है कि सरकारी डॉक्टरों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डॉक्टरों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। पीएमसीएच के डॉक्टर ने कहा कि निजी प्रैक्टिस कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। डॉक्टरों को मूलभूत सुविधाएं सरकार को उपलब्ध करानी चाहिए। सरकार को बगल के प्रदेशों से सीख लेनी चाहिए। राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कुछ शर्तो के डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस की छूट दी गई है। बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उचित सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उदाहरण के तौर राज्य के बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच, आईजीआईसी और एनएमसीएच में हर्ट के पेशेंट को स्टैंट लगाने के लिए 70 हजार रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।

GNSU Admission Open 2026

अगर सरकार इन सुविधाएं को मरीजों तक मुफ्त में उपलब्ध करवाए तो बड़ा बदलाव होगा। कई बड़े और अत्याधुनिक उपकरण आज भी राज्य के सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या काफी कम है। सरकार पहले इन समस्याओं पर ध्यान दे तब डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की सोचे। वहीं बिहार के जाने माने डॉक्टर अमूल्य सिंह ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का फैसला वह अच्छी पहल है। डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आठ घंटे की ड्यूटी करते हैं। सरकार उसी मापदंड से पैसा दे रही है। डॉक्टरों ने इन सब बातों को जानते हुए नौकरी में आते भी हैं। चिकित्सा क्षेत्र में एनडीए सरकार बहुत काम कर रही है। बिहार में बड़े बड़े अस्पताल बन रहे हैं। अगर चिकित्सक इन अस्पतालों में अच्छे से काम करे तो आम लोगों को इससे काफी फायदा मिलेगा। सरकार अगर नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस देती है तो इसका यह काफी अच्छा होगा। यह सभी सरकारी डॉक्टरों को देना चाहिए। तब सरकारी डॉक्टर भी निजी प्रैक्टिस छोड़ पाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 दिसंबर 2025 को सात निश्चय-3 की घोषणा की थी। इसके पांचवें निश्चय में उन्होंने ‘सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन’ की बात कही थी। उन्होंने कहा कि प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (Speciality Hospital) के रूप में तथा जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (Super Speciality Hospital) के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य के नए मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में बेहतर पढ़ाई एवं इलाज के लिए लोक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था एवं सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लाई जाएगी। हालांकि, उस वक्त किसी ने इस पर बहुत ध्यान नहीं दिया था। लेकिन, सात निश्चय 3 की घोषणा के ठीक एक महीने बाद तक जब सीएम नीतीश कुमार ने निजी प्रैक्ट्रिस बंद करने की बात दोहराई तो उनका यह बयान सुर्खियों में आ गया।