पटना, 24 मई। ग्रामीण विकास एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आवास विहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक 41 लाख से अधिक परिवारों ने अपना पक्का मकान बना लिया है। मंत्री ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष 2016-17 से अब तक योजना के तहत 49 लाख 18 हजार 758 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 49 लाख 9 हजार 797 लाभुकों को आवास की स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 41 लाख 12 हजार 565 लाभुकों ने आवास निर्माण का कार्य पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक 48 लाख 57 हजार 308 लाभार्थियों को पहली किश्त, 45 लाख 97 हजार 397 लाभुकों को दूसरी किश्त तथा 42 लाख 5 हजार 864 लाभुकों को तीसरी किश्त की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
पहले चरण में उल्लेखनीय सफलता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक 37 लाख 1 हजार 138 आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध 37 लाख 571 लाभुकों को स्वीकृति दी गई। इनमें से 36 लाख 62 हजार 143 लाभुकों ने मकान निर्माण पूरा कर लिया है। दूसरे चरण में भी तेज प्रगति उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए 12 लाख 17 हजार 620 आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 12 लाख 9 हजार 226 लाभुकों को आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 4 लाख 50 हजार 422 लाभुकों ने मकान निर्माण पूरा कर लिया है।
भुगतान व्यवस्था में बदलाव श्रवण कुमार ने कहा कि योजना पर अब तक लगभग 5.57 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष निर्माण कार्यों के लिए करीब 42 हजार 753 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से सभी लाभार्थियों को सहायता राशि एसएनए-स्पर्श प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य नोडल खाते में राशि समाप्त हो चुकी है, इसलिए ग्रामीण विकास मंत्रालय से 1600 करोड़ रुपये के मदर सैंक्शन की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इंदिरा आवास योजना को पुनर्गठित कर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) लागू की गई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को आवास निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।







