पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही और अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न विभागों में संविदा अथवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य करने के दौरान यदि किसी व्यक्ति द्वारा कदाचार किया गया है और बाद में उसकी नियमित सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई है, तब भी उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकेगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध होने पर संबंधित सरकारी सेवक के विरुद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर विभाग के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें व्यक्तियों पर संविदा नियोजन अथवा बाह्य सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से सेवा देने के दौरान अनियमितता या कदाचार के आरोप लगे थे।
बाद में उनकी नियमित नियुक्ति निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से हो गई।ऐसे मामलों में यह सवाल उठ रहा था कि क्या पूर्व सेवा अवधि के कदाचार के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस विषय पर सरकार ने विधि विभाग के माध्यम से महाधिवक्ता का कानूनी परामर्श प्राप्त किया। महाधिवक्ता ने अपने मत में स्पष्ट किया कि वर्तमान अनुशासनिक प्राधिकारी के पास भले ही उस समय प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रहा हो, जब कथित अनियमितताएं हुई थीं, फिर भी वर्तमान प्राधिकारी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत कार्रवाई शुरू करने का अधिकार प्राप्त है।







