भुवनेश्वर: ओडिशा के ढेंकनाल में करीब नौ लाख रुपये के सरकारी धन के कथित गबन के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सतर्कता न्यायाधीश ने मामले में पूर्व जिलाधिकारी नित्यानंद मोहंती, पूर्व परियोजना निदेशक सूर्यनारायण दास और परिवहन ठेकेदार सत्यनंद बालसामंत को दोषी करार देते हुए एक-एक साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों पर जुर्माना भी लगाया है।
खाद्यान्न परिवहन में नियमों की अनदेखी का आरोप
ओडिशा विजिलेंस के मुताबिक, मामला वर्ष 2001-02 का है। उस समय नित्यानंद मोहंती ढेंकनाल के कलेक्टर थे, जबकि सूर्यनारायण दास जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के परियोजना निदेशक के पद पर कार्यरत थे।
आरोप था कि दोनों अधिकारियों ने परिवहन ठेकेदार सत्यनंद बालसामंत के साथ मिलकर खाद्यान्न के परिवहन में निर्धारित नियमों और दरों का पालन नहीं किया। इसके कारण सरकारी खजाने को करीब नौ लाख रुपये का नुकसान हुआ।
तय दरों की जगह अधिक भुगतान
जांच में सामने आया कि श्रम-प्रधान कार्यक्रम के तहत भारतीय खाद्य निगम के ढेंकनाल गोदाम से विभिन्न ब्लॉकों और ग्राम पंचायत मुख्यालयों तक चावल और गेहूं पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की गई थी।
विजिलेंस के अनुसार, ओडिशा नागरिक आपूर्ति निगम की निर्धारित परिवहन दरों का पालन करने के बजाय ठेकेदार द्वारा दिए गए हैंड कोटेशन को स्वीकार किया गया। इसके बाद निर्धारित दर से अधिक भुगतान किए जाने का आरोप सामने आया।
विजिलेंस ने दाखिल किया था आरोप पत्र
मामले की जांच के बाद ओडिशा विजिलेंस ने पूर्व जिलाधिकारी नित्यानंद मोहंती, सेवानिवृत्त परियोजना निदेशक सूर्यनारायण दास और परिवहन ठेकेदार सत्यनंद बालसामंत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत में मामले की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया और प्रत्येक को एक साल के कारावास की सजा सुनाई गई।
दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने की तैयारी
दोषसिद्धि के बाद ओडिशा विजिलेंस अब पूर्व जिलाधिकारी नित्यानंद मोहंती और पूर्व परियोजना निदेशक सूर्यनारायण दास की पेंशन रोकने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
यह मामला सरकारी योजनाओं और खाद्यान्न परिवहन में नियमों की अनदेखी से जुड़े पुराने भ्रष्टाचार मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







