पटना: Patna में सोमवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकालकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया। यह प्रदर्शन लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित न होने के विरोध में आयोजित किया गया, जिसे महिलाओं के आरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं को राजनीतिक अवसर कुछ परिवारों तक ही सीमित क्यों रखे जा रहे हैं। चौधरी ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो बिहार और देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा इजाफा होता।
उन्होंने बिहार विधानसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि फिलहाल राज्य में केवल 29 महिला विधायक हैं, जबकि विधेयक लागू होने पर यह संख्या 100 से अधिक हो सकती थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2006 में एनडीए सरकार द्वारा पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद उनकी भागीदारी उम्मीद से ज्यादा बढ़ी है। आज स्थिति यह है कि कई जगहों पर 50 प्रतिशत आरक्षण के बावजूद 59 प्रतिशत से अधिक महिलाएं चुनाव जीत रही हैं।
वहीं, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर पलटवार किया। Tejashwi Yadav ने सरकार पर आरोप लगाया कि भाजपा इस विधेयक का इस्तेमाल परिसीमन के मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करने के बजाय ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है, क्योंकि महिला आरक्षण का मुद्दा सीधे तौर पर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है।







