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भक्त रहसू की पुकार पर थावे पहुंचीं मां भवानी: आस्था और अहंकार के अंत की अद्भुत कथा

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Mother Bhavani arrives at the call of devotee Rahsu in Thawe: a wonderful story of faith and the end of ego

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित प्रमुख शक्तिपीठ थावे दुर्गा मंदिर की कहानी भी रोचक और कुछ अजीबोगरीब है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक सच्चे भक्त की जीत और एक अहंकारी राजा के सर्वनाश का जीवंत प्रमाण है। आज भी इस मंदिर की दरो-दीवारों में मां कामाख्या के आगमन और रहषु भगत की अटूट श्रद्धा की गूंज सुनाई देती है। इस अलौकिक कथा की शुरुआत हथुआ के राजा मनन सिंह के शासनकाल से होती है। राजा को अपनी शक्ति और भक्ति पर भारी अहंकार था। उसी दौर में राज्य में भीषण अकाल पड़ा, लोग दाने-दाने को तरसने लगे। उसी समय थावे के जंगलों में मां कामाख्या का परम भक्त रहषु भगत रहता था।

मान्यता है कि रहषु पर माता की ऐसी कृपा थी कि वह दिन भर घास काटता और रात को मां का ध्यान करता, तो उस घास से अन्न बन जाता था। रहषु उस अन्न को भूखे लोगों में बांट देता था। जब यह खबर अहंकारी राजा मनन सिंह तक पहुंची, तो उसने इसे ढोंग मानकर रहषु को चुनौती दे डाली। राजा ने रहषु भगत को दरबार में बुलाकर आदेश दिया कि वह अपनी देवी को साक्षात प्रकट करे। रहषु ने हाथ जोड़कर राजा को चेतावनी दी। महाराज! मां को मत बुलाइए, यदि वे आएंगी तो आपका राज-पाट और सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा। लेकिन सत्ता के नशे में चूर राजा नहीं माना। उसने धमकी दी कि यदि देवी प्रकट नहीं हुईं, तो रहषु और उसके परिवार को जिंदा जला दिया जाएगा।विवश होकर रहषु भगत ने अपनी कुलदेवी कामाख्या का आह्वान शुरू किया। भक्त की करुण पुकार सुनकर मां कामरूप कामाख्या से चल पड़ीं। कथाओं के अनुसार, मां कामाख्या ने रास्ते में कई जगह रुककर भक्त रहषु के माध्यम से राजा को समझाने का प्रयास किया।

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मां पहले आमी पहुंची, फिर घोड़ाघाट। हर पड़ाव पर रहषु ने राजा से हठ छोड़ने की विनती की, लेकिन राजा ने इसे जादू-टोना करार दिया। अंततः मां थावे पहुंची।जैसे ही मां प्रकट हुई, आकाश में बिजली कड़की और आंधी-तूफान उठने लगा। मां ने रहषु भगत के मस्तिष्क को चीरकर अपना कंगन दिखाया। साक्षात देवी का तेज राजा मनन सिंह सहन नहीं कर सका और उसका पूरा परिवार देखते ही देखते भस्म हो गया। मां के दर्शन के बाद रहषु भगत पाताल लोक को प्रस्थान कर गए। आज भी थावे के मुख्य मंदिर के पास ही रहषु भगत का मंदिर स्थित है। परंपरा है कि श्रद्धालु पहले मां के दर्शन करते हैं और फिर रहषु भगत के मंदिर में माथा टेकते हैं। इसके बिना थावे की यात्रा अधूरी मानी जाती है। गोपालगंज मुख्यालय से 6 किमी दूर स्थित यह मंदिर आज लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां जनसैलाब उमड़ता है। मंदिर के समीप स्थित राजा मनन सिंह के किले के अवशेष आज भी उस अहंकार की याद दिलाते हैं जिसका अंत मां भवानी के हाथों हुआ था।