सासाराम: ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर देश-दुनिया में पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत को अकीदत और सादगी के साथ याद किया जा रहा है। इस मौके पर पैगंबर साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में अमन, भाईचारे, इंसानियत, बराबरी और आपसी मोहब्बत बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है।
चौखंडी मोहल्ला निवासी ख्वाजा सकलैन ने ईद-ए-मिलादुन्नबी की धार्मिक और ऐतिहासिक अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद को पूरी इंसानियत के लिए रहमत का पैगाम देने वाला माना जाता है। उन्होंने कहा कि पैगंबर साहब की शिक्षाओं में मानवता, करुणा, न्याय और आपसी सम्मान को विशेष महत्व दिया गया है।
ख्वाजा सकलैन ने बताया कि पैगंबर साहब के दौर से पहले समाज में कई तरह की सामाजिक कुरीतियां और असमानताएं मौजूद थीं। उनकी शिक्षाओं ने लोगों को इंसाफ, भाईचारे और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि ईद-ए-मिलादुन्नबी का अवसर केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों को याद करने का भी अवसर माना जाता है।
इस अवसर पर जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर भी लोगों से विशेष अपील की गई है। ख्वाजा सकलैन ने जुलूस को इस्लामी तहजीब और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ निकालने की अपील करते हुए कहा कि आयोजन के दौरान किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने तेज आवाज और डीजे से परहेज करने की अपील की, ताकि आसपास रहने वाले लोगों और अन्य नागरिकों को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखा जाए और आम लोगों तथा वाहनों के आवागमन के लिए रास्ता सुगम रखा जाए।
उन्होंने कहा कि ईद-ए-मिलादुन्नबी का मूल संदेश अमन, भाईचारा, इंसानियत और आपसी प्रेम है। ऐसे में इस पवित्र अवसर पर सभी लोगों को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।







