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ऑन स्पॉट सजा से कांप रहे अपराधी, बिहार पुलिस का नया एक्शन चर्चा में

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Criminals shudder at the on-the-spot punishment, Bihar Police's new action in the news

पटना: बिहार उत्तर प्रदेश की राह पर है। भले ही चुनाव के पहले यह कहा जाता रहा कि योगी मॉडल बिहार में नहीं आएगा, लेकिन गृह विभाग की कमान जैसे ही सम्राट चौधरी ने संभाली तो परिस्थितियां वैसी बन गईं। मुख्यमंत्री बनने के बाद तो पक्का-पक्का। इसके पहले की सरकार में अपराधियों का हाफ एनकाउंटर चर्चा में रहता था, लेकिन अब तो ऑन स्पॉट जवाब देने की परंपरा सामने दिख रही है। नवंबर से अब तक छह को पुलिस ने ऐसा जवाब दिया कि उनकी जिंदगी जवाब दे गई। जैसा जघन्य जुर्म था, गोली की ताकत उतनी की ज्यादा। नवंबर से अब तक छह को मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया है, जबकि 23 को सिर्फ गोली से गिराया है। तेजस्वी यादव ने कुछ समय पहले आरोप लगाया था कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। एनडीए सरकार अपराधियों पर नकेल कसने के बजाय जाति विशेष को देखकर ‘फर्जी और सिलेक्टिव एनकाउंटर’ की नीति पर काम कर रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा कि अपराधियों की जाति नहीं होती है। हमलोग निष्पक्ष रूप से काम कर रहे हैं। समाज में अशांति फैलाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आइये जानते हैं मुठभेड़ में जो छह अपराधी मारे गए, उनपर क्या-क्या आरोप थे?

31 दिसंबर 2025 को बेगूसराय के तेघड़ा इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 50 हजार रुपए का इनामी नक्सली दयानंद मालाकार उर्फ छोटू मारा गया। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नोनपुर गांव के पास नक्सलियों की बैठक चल रही है। इसके बाद पुलिस टीम सादी वर्दी में इलाके में पहुंची। सरसों के खेत के पास पहले से घात लगाए नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों ओर से कई राउंड गोलियां चलीं, जिसमें दयानंद मालाकार मारा गया। दयानंद पर माकपा नेता दिनेश सिंह के घर को डायनामाइट लगाकर उड़ाने, माकपा नेता रामपुकार चौरसिया की गोली मारकर हत्या करने, लेवी नहीं देने पर सड़क निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन जलाने सहित कई गंभीर नक्सली वारदातों को अंजाम देने के आरोप थे। तेघड़ा, भगवानपुर, वीरपुर, चेरियावरियारपुर और बरौनी थाना क्षेत्रों सहित बेगूसराय, खगड़िया और मुजफ्फरपुर जिलों में उसके खिलाफ कुल सोलह संगीन मामले दर्ज थे। 6 फरवरी 2026 को वैशाली में एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात सोना लुटेरा प्रिंस उर्फ अभिजीत उर्फ चश्मा मारा गया। वह सुबोध सिंह गैंग का शार्प शूटर था और उस पर दो लाख रुपए का इनाम घोषित था। कई राज्यों में सोना लूट, हत्या, रंगदारी और फायरिंग के 30 से अधिक मामलों में वांछित प्रिंस को पुलिस ने हनुमान नगर कॉलोनी में घेर लिया था। दोनों ओर से करीब 30 राउंड फायरिंग हुई, जिसमें पुलिस की गोली लगने से वह घायल हो गया।

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अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, कुख्यात अपराधी प्रिंस उर्फ अभिजीत उर्फ चश्मा देशभर में सक्रिय सोना लुटेरा गिरोह के सरगना सुबोध सिंह का शार्प शूटर था। उस पर बिहार समेत सात राज्यों में हत्या, डकैती, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और करोड़ों रुपये के सोना लूट कांडों से जुड़े 30 से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे। पूर्णिया व तनिष्क शोरूम समेत मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, चेन्नई, पंजाब और ओडिशा में हुई कई बड़ी डकैतियों का मास्टरमाइंड माना जाता था। उस पर 300 किलो से अधिक सोना लूटने की वारदातों में शामिल होने का आरोप था। इसके अलावा वर्ष 2018 में हाजीपुर कोर्ट परिसर में पुलिस हवलदार राम एकबाल रविदास की हत्या कर फरार होने के मामले में भी वह वांछित था। लगातार संगीन अपराधों में संलिप्तता को देखते हुए बिहार पुलिस ने उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। 17 मार्च 2026 को पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र के सिहोरवा गांव में एसटीएफ और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मारे गए। इस एनकाउंटर में एसटीएफ जवान श्रीराम कुमार यादव शहीद हो गए थे। पुलिस के अनुसार, कुंदन ठाकुर ने एडिशनल एसएचओ गौरव कुमार को कई पुलिसकर्मियों की हत्या की धमकी दी थी। मुठभेड़ के दौरान दोनों अपराधियों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों ढेर हो गए।

29 अप्रैल 2026 को भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार और सभापति राजकुमार गुड्डू की हत्या के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को बिहार पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। 28 अप्रैल को नगर परिषद कार्यालय में घुसकर उसने दोनों अधिकारियों पर फायरिंग की थी, जिसमें दोनों की मौत हो गई थी। घटना के बाद वह फरार हो गया था। हथियार बरामदगी के दौरान उसके गुर्गों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने रामधनी यादव को ढेर कर दिया। उसे पांच गोलियां लगी थीं।  रामधनी यादव जब नाबालिग था तब से ही उसका अपराधिक इतिहास रहा है। साल 1982 में पहली पर उस पर हत्या का आरोप लगा था। इसके बाद लूट,हत्या, रंगदारी और चौथ वसूली समेत कई आरोपों लगे। साल 2000 में उसने व्यवसायी की हत्या कर दी और थाने जाकर सरेंडर कर दिया। तब पुलिस भी दंग रह गई थी। 3 मई 2026 को सीवान में भाजपा नेता मनोज कुमार सिंह के भांजे हर्ष सिंह और उनके बहनोई चंदन सिंह पर फायरिंग करने वाले मुख्य आरोपी सोनू यादव को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। 29 अप्रैल की शाम उसने दोनों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसमें हर्ष सिंह की मौके पर मौत हो गई थी। पुलिस को सूचना मिली कि सोनू बाइक से भाग रहा है। इसके बाद लकड़ी और गौसीहाता के बीच घेराबंदी की गई। खुद को घिरता देख उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली उसके सीने में लगी और उसकी मौत हो गई। लूट और हत्या के प्रयास जैसे कई अन्य गंभीर मामले भी दर्ज थे।