रोहतास। पैरवी एवं गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के नारायण स्कूल ऑफ लॉ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को बाल संरक्षण के लिए कानूनी प्रक्रिया को सशक्त बनाने हेतु पारा लीगल स्वयंसेवक का दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विधिक स्वयंसेवकों को जागरूक करना, उन्हें बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों की गहन जानकारी देना तथा जमीनी स्तर पर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जगदीश सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधिक स्वयंसेवक इस कड़ी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो समाज और न्याय प्रणाली के बीच सेतु का कार्य करते हैं। विधि संकाय के डीन डॉ. विनोद कुमार सरोज ने अपने वक्तव्य में बाल संरक्षण के कानूनी ढांचे पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो एक्ट और अन्य प्रासंगिक कानूनों का सही क्रियान्वयन तभी संभव है, जब जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोग इनकी बारीकियों को समझें। उन्होंने विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि कानून की पढ़ाई केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने में होना चाहिए। बाल अधिकार कार्यकर्ता सुनील झा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज भी ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बाल संरक्षण को लेकर जागरूकता का अभाव है, जिसके कारण बच्चों के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में जानकारी के अभाव में पीड़ित परिवार उचित कानूनी सहायता नहीं ले पाते। उन्होंने विधिक स्वयंसेवकों से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें और जरूरत पड़ने पर बच्चों को न्याय दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। मानव अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने कहा कि बाल संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रति संवेदनशील होना होगा। उन्होंने बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन और अन्य संस्थाओं के समन्वय को मजबूत करने पर बल दिया, ताकि जरूरतमंद बच्चों तक समय पर सहायता पहुंच सके।
इस अवसर पर प्रोफेसर संगीता सिंह, पैरवी संस्था के दीनबंधु वत्स तथा बाल कल्याण समिति के सदस्य ददन जी पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे और बाल अधिकारों की सुरक्षा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं, नारायण स्कूल ऑफ लॉ के छात्र-छात्राओं एवं विधिक स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। सत्र के दौरान बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं—जैसे बाल श्रम, बाल विवाह, यौन शोषण, एवं पुनर्वास—पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया, जिससे उन्हें व्यावहारिक समझ विकसित करने में सहायता मिली। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाएंगे, कानूनी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाएंगे तथा जरूरतमंद बच्चों को न्याय दिलाने में सक्रिय सहयोग देंगे I







