रोहतास। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान की सहायक प्राध्यापिका रंजू कुमारी ने मत्स्य किसानों को बढ़ती गर्मी में उचित तालाब प्रबंधन के लिए उपयुक्त कदम उठाने की अपील की है।उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने से तालाब के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे मछलियों की वृद्धि और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। रोहतास जिले में अप्रैल से जून तक तापमान काफी अधिक हो जाता है, इसलिए इस समय मछली पालन में विशेष सावधानी जरूरी है।गर्मी में तालाब का पानी तेजी से सूखता है।तालाब में पानी का स्तर कम से कम 1.5–2 मीटर रखें। जरूरत पड़ने पर बोरिंग या नहर के पानी से पूर्ति करें। उच्च तापमान में पानी में घुलित ऑक्सीजन कम हो जाती है।सुबह के समय मछलियाँ सतह पर आने लगें तो यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत है। पंप, फव्वारा या पंखा लगाकर सुबह और शाम तालाब के पानी को हिलाने से भी ऑक्सीजन बढ़ती है। तालाब के किनारों पर पेड़ लगाएं या जाल/शेड नेट का उपयोग करें। इससे पानी का तापमान नियंत्रित रहता है। मछलियों को कम मात्रा में लेकिन बार-बार आहार दें। सुबह और शाम के समय ही आहार दें, दोपहर में नहीं। अधिक भोजन देने से पानी खराब होता है, इसलिए सावधानी रखें। पानी की गुणवत्ता बनाए रखें। समय-समय पर पानी की जांच कर सुनिश्चित करें कि अम्लता-क्षारता माप 7–8.5 के बीच हो। अमोनिया की मात्रा बढ़ने पर 10–20 प्रतिशत पानी बदलें। चूना का प्रयोग 40 से 80 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से करें। गर्मी में मछलियाँ जल्दी बीमार होती हैं। यदि मछलियों में सुस्ती, घाव या रंग बदलना दिखे तो तुरंत उपचार करें। पोटाशियम परमैंगनेट का उपयोग 2–3 मिलीग्राम प्रति लीटर में किया जा सकता है। तालाब में गंदगी,खरपतवार और सड़े हुए पदार्थ हटाते रहें। अधिक काई होने पर नियंत्रण करें। गर्मी के मौसम में थोड़ी अतिरिक्त देखभाल और सही प्रबंधन अपनाकर किसान मछली पालन में अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। पानी का स्तर, ऑक्सीजन, और आहार प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने से मछलियों की मृत्यु दर कम होती है और लाभ बढ़ता है।







